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बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड भंग: सत्ता के दुरुपयोग और चुनाव धांधली के बाद तमीम इकबाल ने संभाली कमान

Ezra Mehta · · 1 min read
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बांग्लादेश क्रिकेट में बड़ा प्रशासनिक धमाका: बीसीबी बोर्ड को सरकार ने किया भंग

बांग्लादेश क्रिकेट में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मोड़ आया है। अक्टूबर 2025 के बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के चुनावों में हुई भारी अनियमितताओं, वोट-रिंगिंग और सत्ता के दुरुपयोग की जांच के बाद, सरकार ने वर्तमान बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई उस पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसका नेतृत्व पूर्व जस्टिस ए के एम असदुज्जमां कर रहे थे। समिति ने रविवार को अपनी जांच रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौंपी, जिसके बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बोर्ड को भंग कर दिया।

जांच समिति के सनसनीखेज खुलासे और अमीनुल इस्लाम की भूमिका

समिति की रिपोर्ट में बीसीबी के पूर्व शीर्ष नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम और उनके करीबी सहयोगियों ने जांच प्रक्रिया में सहयोग करने से बार-बार इनकार किया। अमीनुल इस्लाम ने पिछले सप्ताह एक साक्षात्कार में यह स्वीकार किया था कि उन्होंने समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय केवल लिखित उत्तर भेजे थे। राष्ट्रीय खेल परिषद (NSC) के खेल निदेशक मोहम्मद अमीनुल अहसान ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्ट के मुख्य अंशों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बीसीबी के चुनाव न तो स्वतंत्र थे, न निष्पक्ष और न ही पारदर्शी।

चुनावी धांधली और वोटरों को डराने-धमकाने के सबूत

जांच समिति ने पाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को डराया-धमकाया गया और प्रक्रियात्मक अनियमितताएं अपने चरम पर थीं। अहसान ने बताया कि सरकार के पास बोर्ड को भंग करने के लिए पर्याप्त कारण थे। रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पार्षदों (councillors) के नाम जमा करने की समय सीमा को लेकर हुआ। जांच में पाया गया कि यह समय सीमा बिना किसी ठोस कारण के बार-बार बढ़ाई गई थी। मूल रूप से 17 सितंबर की समय सीमा को पहले 19 सितंबर और फिर 22 सितंबर तक बढ़ाया गया। समिति का मानना है कि ऐसा ‘छिपे हुए इरादों’ के साथ किया गया था ताकि पहले से नामांकित पार्षदों को हटाकर पसंदीदा व्यक्तियों को जगह दी जा सके और उन्हें निदेशक के रूप में चुने जाने का अवसर दिया जा सके।

तमीम इकबाल: शिकायतकर्ता से बोर्ड अध्यक्ष तक का सफर

इस पूरे प्रकरण में सबसे उल्लेखनीय बदलाव पूर्व कप्तान तमीम इकबाल की नियुक्ति है। तमीम इकबाल ने पिछले साल चुनाव से चार सप्ताह पहले अमीनुल इस्लाम पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। जांच समिति ने तमीम के उन आरोपों को सही पाया है। तमीम को अब बीसीबी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह अगले तीन महीनों तक चलने वाली 11 सदस्यीय तदर्थ समिति का नेतृत्व करेंगे। यह बदलाव बांग्लादेशी क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है, जो लंबे समय से बोर्ड में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे।

संविधान का उल्लंघन और सत्ता का दुरुपयोग

रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि कैसे पूर्व अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम और तत्कालीन निदेशक नजमुल अबेदीन फहीम ने अपने प्रभाव का उपयोग करके चुनावों में अपनी पार्षद पद (councillorship) सुरक्षित की थी। समिति ने पाया कि खेल मंत्रालय के अधिकारियों के प्रभाव के कारण उन्हें पिछले साल 8 सितंबर को ढाका डिवीजन और जिला तदर्थ समितियों में शामिल किया गया था। इसे ‘सत्ता का गंभीर दुरुपयोग’ करार दिया गया है। इसके अलावा, अमीनुल इस्लाम पर बीसीबी संविधान के अनुच्छेद 9.3.3 के उल्लंघन का भी आरोप लगा है। उन्होंने बोर्ड की अनुमति के बिना और बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के 10 पूर्व क्रिकेटरों को एकतरफा रूप से पार्षद नियुक्त किया था, ताकि वे उनके पक्ष में मतदान कर सकें। समिति को उस कथित बोर्ड बैठक का कोई ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिला, जिसमें अमीनुल ने दावा किया था कि निदेशकों ने उन्हें इन नियुक्तियों के लिए अधिकृत किया था।

होटल शेरेटन में ई-वोटिंग घोटाला

चुनावों की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा प्रहार ई-वोटिंग प्रणाली के माध्यम से किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, अमीनुल इस्लाम और एनएससी के कुछ अधिकारियों ने ई-वोटिंग प्रक्रिया में धांधली की। मतदाताओं के साक्षात्कार से पता चला कि ई-वोटिंग प्रणाली पहले से ही सुनियोजित (pre-planned) थी। समिति ने पाया कि ई-वोटिंग एक विशिष्ट स्थान से आयोजित की गई थी और वोट की गोपनीयता बनाए नहीं रखी गई थी, जो बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांतों और बीसीबी संविधान के खिलाफ है। अधिकांश मतदाता मतदान के दिन मतदान केंद्र पर मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद राजधानी के होटल शेरेटन में ई-वोटिंग कराई गई, जिसे समिति ने स्पष्ट रूप से ‘वोटों की धांधली’ माना है।

भविष्य की राह और नई समिति की चुनौतियां

जांच में यह भी पाया गया कि पूर्व उपाध्यक्ष फारुख अहमद को भी अनुचित लाभ दिया गया था, जिन्होंने 22 सितंबर की समय सीमा समाप्त होने के बाद अपना नामांकन जमा किया था। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने बीसीबी के शासन को पूरी तरह से बदलने का निर्णय लिया है। नई तदर्थ समिति की प्राथमिक जिम्मेदारी बोर्ड के दैनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाना और अगले तीन महीनों के भीतर एक पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव की नींव रखना है। तमीम इकबाल के नेतृत्व में यह नई टीम अब बांग्लादेश क्रिकेट की छवि को सुधारने और बोर्ड के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने की चुनौती का सामना करेगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बांग्लादेश क्रिकेट के भविष्य के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है।

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Ezra Mehta

Ezra Mehta is a cricket statistician providing live score tracking, match reports, and player performance data. He specializes in real-time match insights.