मणिपुर के लामबाम अजय सिंह को अजीब आउट होने का शिकार – रणजी ट्रॉफी में दो बार गेंद मारने पर आउट
मणिपुर के लामबाम अजय सिंह का अजीब आउट: क्रिकेट के दुर्लभतम नियम का शिकार
रणजी ट्रॉफी, भारतीय क्रिकेट का पुराना और सर्वश्रेष्ठ घरेलू प्रारूप, फिर एक बार दुनिया के सबसे दुर्लभ क्रिकेट आउट में से एक का गवाह बना। मणिपुर के बल्लेबाज लामबाम अजय सिंह को मेघालय के खिलाफ सूरत में खेले जा रहे प्लेट लीग मैच में ‘गेंद को दो बार मारने’ के कारण आउट कर दिया गया।
क्या हुआ था मैदान पर?
अजय सिंह ने एक डिलीवरी को अर्यन बोरा के खिलाफ सामने की ओर डिफेंड कर दिया। लेकिन फिर, बिना किसी जरूरत के, उन्होंने उसी गेंद को दोबारा बल्ले से धकेल दिया – इस बार गेंदवाले की ओर। मेघालय के खिलाड़ियों ने तुरंत अपील की। अंपायर म. मधु ने सोच-समझकर फैसला सुनाया और अजय सिंह को आउट दे दिया।
सबसे हैरानी की बात यह थी कि न तो बल्लेबाज ने आपत्ति जताई, न ही किसी ने मैदान पर विवाद खड़ा किया। फैसला सही मान लिया गया।
नियम 34.1.1: दो बार गेंद मारना
MCC के नियम 34.1.1 के अनुसार, बल्लेबाज तब ‘आउट’ होता है जब खेल चल रहा हो और वह गेंद को पहले पकड़ या तोड़ के बाद, जानबूझकर दूसरी बार बल्ले या शरीर से मारता है – सिवाय इसके कि दूसरी बार मारना सिर्फ अपने विकेट की रक्षा के लिए हो।
यह आउट ‘फील्ड में रोकथाम’ (obstructing the field) नहीं माना जाता। इस मामले में अजय सिंह न तो मैदानी खिलाड़ी को गेंद वापस दे रहे थे और न ही अपने विकेट की रक्षा कर रहे थे। ऐसे में नियम के तहत उनका आउट होना तर्कसंगत था।
रणजी ट्रॉफी का लंबा इतिहास
यह आउट इतना दुर्लभ है कि पिछली बार रणजी ट्रॉफी में यह 2005-06 सत्र में हुआ था, जब जम्मू-कश्मीर के कप्तान ध्रुव महाजन ने झारखंड के खिलाफ ऐसा ही किया था।
इससे पहले मात्र तीन खिलाड़ी इस नियम में आउट हुए:
- आंध्र प्रदेश के के. बावना (1963-64)
- जम्मू-कश्मीर के शाहिद परवेज (1986-87)
- तमिलनाडु के आनंद जॉर्ज (1998-99)
मैच का क्या हुआ?
अजय सिंह का सिर्फ 20 गेंदों का डक एक निर्णायक क्षण बन गया। इसके बाद मणिपुर के निचले क्रम का पतन हो गया, जिससे उन्हें मेघालय के खिलाफ 88 रनों की बढ़त झेलनी पड़ी।
अब मणिपुर की कोशिश इस मैच से ड्रॉ निकालने की होगी, क्योंकि एक अंक भी उन्हें प्लेट फाइनल में पहुंचने के लिए काफी होगा।
एक दुर्लभ पल का दस्तावेजीकरण
लामबाम अजय सिंह का आउट न सिर्फ उनके निजी क्रिकेट करियर का एक निराशाजनक पल है, बल्कि भारतीय क्रिकेट इतिहास में भी एक दुर्लभ घटना के रूप में दर्ज हो गया है।
ऐसे मौके याद रखे जाते हैं – न कि इसलिए कि वे बड़े शॉट्स या रन रिकॉर्ड्स के बारे में होते हैं, बल्कि क्योंकि वे क्रिकेट के नियमों की गहराई और बारीकी को उजागर करते हैं।
शायद अगली बार जब कोई बल्लेबाज अनावश्यक तरीके से गेंद को दूर धकेलने के बारे में सोचे, तो अजय सिंह के इस पल को याद कर ले।
