क्या आप बुमराह के साथ शमी जैसा व्यवहार करेंगे? वसीम जाफर ने अजित अगरकर पर साधा निशाना
भारतीय क्रिकेट के चयन पैनल पर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। पूर्व बल्लेबाज वसीम जाफर ने भारतीय चयन समिति, खासकर मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर, पर तीखा हमला किया है। उनका कहना है कि मोहम्मद शमी के साथ बीसीसीआई और चयनकर्ताओं द्वारा किया जा रहा व्यवहार अनुचित और अपमानजनक है।
शमी का रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन
मोहम्मद शमी को अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी टेस्ट मैच के लिए फिर से नजरअंदाज कर दिया गया है। उन्होंने आखिरी बार 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की ओर से खेला था, और तब से चयन समिति ने उन्हें टीम में जगह नहीं दी।
हालांकि, इस बीच शमी ने घरेलू क्रिकेट में जबरदस्त वापसी की है। रणजी ट्रॉफी के सात मैचों में उन्होंने 37 विकेट झटके, जिसमें बंगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका थी। उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 16 और विजय हजारे ट्रॉफी में 15 विकेट भी हासिल किए।
अगरकर का बयान: विवाद का केंद्र
चयनकर्ताओं का तर्क है कि शमी अब केवल टी20 क्रिकेट के लिए उपयुक्त हैं। इस बात को लेकर जाफर ने सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा,
यह तर्क बकवास है। हम बात कर रहे हैं मोहम्मद शमी की, जिन्होंने भारत के लिए कई बड़े मैच जीते हैं। उनकी क्षमता को सिर्फ टी20 तक सीमित करना अनुचित है। वह बंगाल को रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल तक ले गए। उन्होंने गेंदबाजी हमले का नेतृत्व स्वयं किया। अगर वह इतने फिट नहीं हैं, तो स्पष्ट कारण बताएं।
बुमराह की तुलना: दोहरे मापदंड का सवाल
जाफर ने एक अहम सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर जसप्रीत बुमराह ऐसी स्थिति में होते, तो क्या उनके साथ ऐसा ही व्यवहार होता? उन्होंने कहा,
“शमी बुमराह जैसे गेंदबाज हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोई भी गेंदबाज शमी को टॉप ब्रैकेट में रखेंगे। लेकिन जब उनके साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो यह असम्मानजनक लगता है।”
बुमराह को अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट और तीन मैचों की वनडे सीरीज से आराम दिया गया है। उनका कामकाज सावधानी से प्रबंधित किया जा रहा है। इसके बावजूद, आईपीएल 2026 में वह फॉर्म में नहीं हैं।
आईपीएल 2026 में शमी का प्रदर्शन
शमी लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए आईपीएल 2026 में खेल रहे हैं। 12 मैचों में उन्होंने 10 विकेट लिए हैं। वह पिछले सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए औसत प्रदर्शन के बाद लखनऊ में ट्रेड किए गए थे।
चयन में पारदर्शिता की मांग
जाफर ने चयन समिति से स्पष्टता की मांग की है। उनका मानना है कि अगर शमी को भारतीय टीम में नहीं चाहते, तो उसकी वाजिब वजह बताई जानी चाहिए। बस इतना कह देना कि वह टेस्ट क्रिकेट के लिए फिट नहीं, पर्याप्त नहीं है।
शमी के जैसे अनुभवी गेंदबाज के प्रति ऐसा व्यवहार न सिर्फ उनके लिए अपमानजनक है, बल्कि घरेलू क्रिकेट में लगन और जुनून दिखाने वाले खिलाड़ियों के लिए भी एक गलत संकेत है।
क्या भारतीय चयनकर्ता वास्तव में घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शनों को गंभीरता से ले रहे हैं? यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है।
